कहने को तो इस देश में लोग अक्सर बड़ी-बड़ी बात करने में पीछे नहीं हटते. फिर चाहे वो बात समाज सेवा की हो या किसी और की. पर जब भी लड़का या लड़की की बात आती है तो न जाने क्यूँ वो सोचने लग जाते है, न जाने क्यूँ लड़के का नाम सुनते ही वो खुश हो जाते है और लड़की का नाम सुनते ही उदास. क्या सिर्फ लड़का ही सब कुछ होता है लड़की कुछ नहीं होती, क्यूँ एक परिवार का वंश लड़के से ही चलता है जबकि लड़की भी तो उसी परिवार की है तो उससे क्यूँ नहीं चल सकता.
लड़की जो बहुत समझदार, सहनशील, होती है वो सबको एक साथ एक ही धागे में जोड़ कर रखती है फिर क्यूँ इतना भेद भाव करते है हम लोग, जिस तरह गाडी एक पइये पे नहीं चल सकती ढीक उसी तरह बिन लड़की के ये दुनिया नहीं चल सकती.
वो लड़की जिससे परिवार की इज्जत होती है तो क्या उससे परिवार की शान नहीं हो सकती, क्या उसके संस्कार से परिवार की पहचान नहीं हो सकती, क्या वो अपने परिवार का गुरुर नहीं बन सकती. बन सकती है लेकिन उसके लिए हमे पहल करनी होगी हमे अपनी सोच बदलनी होगी और लड़के से भी जादा महत्तव लड़की को देना होगा आज हमारे देश में लड़की भी हर काम करने की हिम्मत रखती है, हमे सिर्फ उनका साथ देना है न की उन्हें इस संसार में आने से रोकना है, ऐसा करने से हमारा परिवार के साथ हमारे देश का भी विकास होगा. तो आइये-
देश के विकास के लिए हमे हाथ बढाना है
लड़कियों की संख्या को लडको के बरावर लाना है!!
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