इस समाज में एक लड़की का क्या दर्जा है देवी का , गायत्री का, सरस्वती का, नहीं , यह पवित्र नाम अब केबल नाम ही रह गए है . अब आप सब को मैं बताती हूँ की आखिर हमारे समाज में एक लड़की का क्या दर्जा रह गया है , इस समाज मैं लड़की का एक ही दर्जा है और वो है 'सौदा' , जी हाँ इसमें चोकने वाली कोई बात नहीं , क्यूँ की यह पड़ने में सुनने में कितना भी अजीब लगे परन्तु सच यही है की अब लड़की का सिर्फ सौदा ही होता है .
क्यूँ की एक बाबुल की बेटी का रूप चाहे कैसा भी हो पर वो अपने बाबुल की लाडली ही होती है और जब उस लाडली की शादी का समय आता है तब उस्सका सौदा होता है और वो यह की आप हमे बस इतने पैसे दे दे दो हम सब देख लेंगे ,और जब लड़के वालो को लगता है की यह लोग हमारे standard के नहीं है तो वो लड़की से रिश्ता तोड़ने की बात करता है और रिश्ता टूट जाने के डर से पिता अपनी हैसियत भूल कर कर्ज लेकर अपनी बेटी विदा करता है और बेटी के जाने के बाद उस लड़की के मायके का रंग ही उद्द जाता है
जिन्दगी का सबसे बड़ा त्याग है एक पिता का ,
की रंग बेटी की जिन्दगी में है भरना ,
यही एक मात्र उनका अपना सपना ,
भविष्य में क्या होगा हमरा इसकी परवाह नहीं ,
वर्तमान में रहे खुश बेटी हमारी सपना यही ,
लेकर कर्ज ही चाहे करनी पड़े विदाई ,
कोई गम नहीं इसका बेटी हुई पराई,
ख़ुशी इतनी होती है की मेरी लाडली का घर बस गया ,
अब चाहे मौत भी आ जाय इसका कोई डर नहीं !!!!












