हम सब विकास चाहते है , अपना भी और अपने आस पास का भी , और इसी बात को ध्यान रखकर हम अपने नेता का चुनाव करते है और उम्मीद रखते है की शायद यही वो इंसान हो जो हमारा उद्धार कर सके, हमारी जरूरतों को पूरा कर सके पर क्या इन नेता रूपी समाज सेवको से यह उम्मीद लगाना उचित है क्यूँ की अगर ये लोग हमारी जरूरतें पूरी करेंगे तो इनकी जरूरतें कोंन पूरी करेगा , इन्हें समाज सेवा शोभा नहीं देता , इन्हें शोभा देता है इनकी ढगी , अहसान फरामोशी , लालच और स्वार्थ ही इन्हें शोभा देता है और यही सब करना इन्हें ख़ुशी देता है .
इन्ही सब के बीच में एक महान , साधारण और सझम वियक्ति भी है जिन्हें केवल एक ही चीज सुनाई देती है और एक ही चीज देखाई देती है और वो है " सेवा " वह वियक्ति है श्री राजेंद्र प्रसाद सिंह जो सिर्फ सेवा के लिए ही जीवत है इनका एक ही उद्देश्य है निस्वार्ध मन से सेवा और सिर्फ सेवा यह वो शख्स है जिन्होंने पूरा जीवन केवल धरती माँ की सेवा में लगा दिया इनका कहना है की जल ही जीवन है धरती हमारी माता है और हम सब उस माँ की गोद में बैठे है और इस माँ की सेवा और इस माँ की रक्षा ही इनका सबसे बड़ा कर्त्तव्य है और इस कर्त्तव्य को भली भांति निभा रहे है.
"इस महान शक्स ने 6 अगस्त 1959 को उ.प के बागवत जिले के दोला गाँव में जन्म लेकर पुरे गाँव को अपनी रोशनी से जगमग किया , इन्होने एक राजपूत परिवार में जन्म लिया और जमींदारी इनका पेशा था , यह अपने सात भाई बहीनो में सबसे बड़े थे ,इनके पिता एक जमींदार थे जिनके ऊपर ६० एकड़ जमीन की देख रेख करने की जिमेदारी थी , इनके लिया बहुत बड़ा दिन था जब श्री राकेश शर्मा जी इनके घर आये और एक वयस्क राजेंद्र सिंह की सोच को बाहर निकाला और तभी से राजेंद्र सिंह गाँव के विकास में शर्मा जी की मदद करने लगे , श्री राजेंद्र जी ऐसे दिग्गज इंसान है जिन्होंने अपने कदम लगातार आगे की ओर बढाये.
श्री राजेंद्र प्रसाद सिंह जी को वाटर मैंन ऑफ़ इंडिया कहा जाता है क्यूँ की इन्होने हमारे भारत में पानी को सुरक्षित करने के लिए बहुत सारी योजनाये बनाई और उसमे बहुत काम किया है इन्होने 2001 में एक समुदाय के नेतृत्व के लिए जल संचयन और जल प्रबंधन का प्रयास किया जिसके लिए इन्हें रोमन मैंग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया , 1975 से यह एक गैर सरकारी संगठन चला रहे है जिसका नाम है तरुण भारत सिंह जिसकी सहायता से वह रेगिस्तान जैसे इलाको में जाकर छोटे छोटे डैम का निर्माण कर जल को सुरक्षित रखने का काम करते है . तरुण भारत सिंह संगठन की मदद से इन्होने ८६०० जोहाड़ का निर्माण क्या जो जल सुरक्षित संरचना है और जिसका प्रयोग हम शुष्क मुसम मैं पानी इकट्टा करने के लिए करते है .
गाँव मैं पानी के कभी कमी न हो इसलिए इन्होने बहुत नहर, तालाब और डैम का पुनः निर्माण करवाया .
गंगा अभियान मैं जोरो सोरों से लगे सदस्यों मैं से एक है श्री राजेंद्र प्रसाद सिंह जी जिन्होंने नेशनल गंगा रिवर वेसन अथोरिटी जो सन २००९ मैं स्थापित की गई उसके साथ मिलकर गंगा को बचाने का प्रयास निरंतर कर रहे है ;
श्री राजेंद्र प्रसाद सिंह जी बहुत ही सरल और सरल ह्रदय के वियक्ति है वह जितने सरल है उतनी ही सरल उनकी बोल चाल की भाषा ,क्यूँ की यही उनकी शक्ति है जिसके बल पर उन्होंने दूर दूर तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया और लोगो को अपनर विचार बड़े सुन्दर तरीके से वियक्त किये ,
कुछ वर्ष पूर्ब दयालबाग शिक्षण संस्थान मैं गैर सरकारी संगठन स्फीहा द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी हुई जिसमें बड़े बड़े दिग्गजों ने सिरकत की जिस मैं श्री राजेंद्र प्रसाद सिंह जी भी उपस्थीत थे , यहाँ इन्होने इतनी खूबसूरती से अपने विचार रखे की चारों ओर तालियौं की गूँज सुनाई देने लगी , कारन ये था की उन्होंने एक आम भाषा का सहारा लिया और उस आम जनता के सामने अपने विचार रखे उन्होंने कहा की हमारे गाँव मैं यह नहीं कहा जाता की हमारी धरती को भुमंडलिए करण से बचाना है बल्कि यहे कहा जाता है की हमारी धरती माँ को बुखार है जिस तरह एक वियक्ति को बुखार आ जाने पर वह चारपाई पकड़ लेता है और थकान महसूस करता है उसी तरह धरती माँ भी बीमार है जिनका इलाज जल्द होना चाहिए, यूँ समय वर्वाद करके नहीं वल्कि हम सबको मिल कर एक समूह मैं अपने कदम आगे बढाने होंगे यूँ संगोष्ठी करके ओपर भाषण दे कर कुछ हासिल नहीं होगा ,
यही वो महान वियक्ति है जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन इस धरती माँ को समर्पित कर दिया और जल को सुरक्षित रखने के लिए हेर सम्ब्हब प्रयास किया और लगातार कर रहे है .
माना जल जीवन जैसा
न जाने कैसे सोचा ऐसा
किया उन्होंने काम ही ऐसा
जाकर हर गाँव , शहर , छेत्र . मोहल्ला
दी जानकारी , करो धरती की सेवा
दी पदवी धरती को , माँ की जैसी
यही करती है रक्षा , साए के जैसी
माँ की सेवा और जल की सुरक्षा
एक मात्र प्रसाद जी के जीवन की कक्षा
बस इन्ही सब से रची इन्होने
अपने जीवन की रचना !!
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