कहा जाता है की दोस्ती बर्फ के गोले के सामान होती है,
जिसे पाना तो आसान होता है लिकिन उसे बनाये रखना,
बहुत ही मुस्किल.
अगसर ऐसा देखा गया है की दोस्ती सिर्फ लडको की ही समझी जाती है न की लड़कियों की , क्यूँ किया लडकियां रिश्ते निभाना नहीं जानती या लडको से बेहतर कर दिखाएंगी इस बात का डर रहता है .आपने तो देखा ही होगा की अगसर
ऐसा
माना जाता है कि लड़कों की अपेक्षा में लड़कियों के बीच दोस्ती जरा कमजोर हुआ
करती है। इसके पीछे बहुत सारे कारण हो सकते हैं जैसे लड़कियों में
ईर्ष्या ज्यादा होती है, उन्हें सिर्फ गॉसिपिंग में मजा आता है, सीक्रेट्स छुपाने में कमजोर हुआ करती हैं, कभी भी किसी से बात कर लेती है , कम लोग बुरे लगते है , सबकी मदद करना पसंद करती है , दोस्त की बात कब बुरी लगे ये पता नहीं चलता है आदि-आदि... लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है।
लड़कियाँ भी आपस में अच्छी दोस्त हुआ करती हैं।
लड़के
ये कहते जरा भी नहीं हिचकते कि लड़कियाँ आपस में बैठकर सिर्फ लड़-झगड़ सकती
हैं। वे आपस में कभी भी अच्छी दोस्त नहीं होतीं जबकि ये सब बकवास है , जो
लोगों के जहन में घर कर गया है। यदि ऐसा होता तो महिलाओं की दोस्ती
की सूची में एक भी महिला शामिल न होती बल्कि उनकी सूची पुरुषों से भरी
मिलती जबकि हकीकत यह है कि महिलाओं की छोटी-मोटी नोकझोंक भी उनके बीच
दूरियाँ कम करने में सफल होती हैं। भविष्य में भी उनमें एक होने की संभावना
बनी रहती है, जबकि पुरुष एक बार किसी को दुश्मन बना लें , तो वह कभी भी
एक-दूसरे को पलटकर देखना तक पसंद नहीं करते।
महिलाओं
के लिए हर रिश्ता अलग होता है, अनोखा होता है। वे सिर्फ उन्हें सँजोए रखने
की कोशिश करती हैं। हालाँकि हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि
महिलाओं का स्वभाव बातूनी होता है। इसलिए उन्हें गॉसिप्स करना सबसे अच्छा
लगता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे एक-दूसरे का साथ निभाने से जरा भी पीछे
नहीं हटतीं। असल में महिलाओं में आपसी दोस्ती के मायने अलग होते हैं। किसी
के लिए उसका सर्वस्व समर्पण होता है तो किसी के लिए उनके दिल में बहुत जगह होती है।
अब
विज्ञान भी इस बात का समर्थन करता है कि महिलाएँ आपस में बिलकुल भिन्ना
होती हैं जिसका अंदाजा पुरुष लगा भी नहीं सकते। ऑफिशियल तौर पर अब इस बात
की पुष्टि हो गई है कि महिलाओं की दुनिया में दोस्ती, त्याग, समझौता
पुरुषों की तुलना में कई गुना ज्यादा होता है। महिलाएँ एक-दूसरे को सपोर्ट
करने के लिए, मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं। इसके अलावा जब वे साथ
होती हैं, तब उनमें हैप्पी हारमोंस बहुतायत में विकसित हो रहे होते हैं,
महिलाएँ साथ लंच करें या साथ बैठकर गॉसिप्स करें। इन सभी कारणों से उनमें
प्रोजेस्टेरोन हारमोन्स, मूड बदलने में सहायक हारमोन होता है, उसका शरीर में
विकास होता है। इससे वे सभी तरोताजा हो जाती हैं।
लेकिन पुरुषों के मुँह में ताला लगाने के लिए जरूरी है कि वैज्ञानिकों
ने भी उनकी नजदीकियों की पुष्टि की है। इस बात का भी खुलासा हुआ है कि
महिलाएँ अपनी सारी बातें पुरुष दोस्त को नहीं बता पातीं इसलिए जब वे आपस
में बात करती हैं, चाहे वे बेस्ट फ्रेंड हों या फिर नॉर्मल फ्रेंड्स सबको
राहत महसूस होती है, तनावमुक्त रहती हैं और समस्याओं को आसानी से सोल्व कर
लेती हैं। इसकी कई वजहें हैं। शायद
एक जैसी स्थिति से हर महिला गुजरती है, इसलिए वे एक-दूसरे को पुरुषों की
तुलना में बेहतर जानती हैं। महिला स्थिति को भाँप लेती है, जबकि पुरुष को
हर बात एक-एक कर बतानी पड़ती है।
महिलाओं के लिए जहाँ दोस्ती भावनाओं और
संवेदनाओं से जुड़ी होती है, वहीं वे एक-दूसरे से सिर्फ माँगती ही नहीं
बल्कि देना भी जानती हैं। जबकि पुरुषों के लिए दोस्ती महज मौज-मस्ती तक ही
सीमित होती है। आमतौर
पर पुरुष मानते हैं कि महिलाओं को राजदार नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि
उनके पेट में कोई बात नहीं पचती, लेकिन हकीकत यह है कि जरूरत पड़ने पर
महिलाएँ एक-दूसरे के राज को हमेशा राज बनाए रख सकती हैं, जहाँ तक पुरुष
कल्पना भी नहीं कर सकते।
इन सब का मतलब यह है की महिलाओं की दोस्ती किसी भी मायने में पुरुषों
की दोस्ती से कम नहीं होती, बल्कि हम कह सकते हैं कि दोस्ती निभाने में
महिलाएँ पुरुषों से एक कदम आगे ही होती हैं। इसलिए , कभी भी महिलाओं की दोस्ती
पर सवाल उठाने से पहले एक बार सोचिएगा जरूर, क्योंकि ये एक-दूसरे के लिए
हमेशा ख़ास होती हैं।


बहुत अच्छा आप सब लोग खूब मेहनत करे और खबरों के प्रति समझ को ज्यादा पैना करे रोजाना कुछ ना कुछ लिखे जरूर मेहनत से ना जी चुराएं। सफलता 200% जरूर मिलेगी।
ReplyDeleteयह आप सभी मित्रों के लिए सलाह है।
आप सबों का अनामी