कहना है मेरा उन लोगो से ,
जो डरते है आवाज उठाने से ।।
जब -जब बात आई राजनीती की ,
तब -तब बात आई दंगो की भी,
बिन दंगो के नहीं कोई मेल,
राजनीती का यही है खेल,
जब -जब बात आई सरकार बनने की,
तब - तब बात आई निति की भी,
कुछ कहे ये सरकार हमारी बनेगी,
कुछ कहे ये सरकार हमारी बनेगी,
कहना है मेरा उन लोगो से ,
जो डरते है आवाज उठाने से ।।
ये खेल है सारा वोटो का ,
और कहें तो मताधिकार का ,
कोई कहें मेरा वोट बी.जे.पी को,
तो कोई कहें मेरा वोट कोंग्रस को,
देता जाता है ,मानव,
अपने ही अधिकार का वोट,
कहने को तो हर बार ही,
आती ये सरकार है,
कहना है मेरा उन लोगो से,
जो डरते है आवाज उठाने से ।।
लोगो की आदत है वही,
कहते ये सरकार अच्छी नहीं,
तो फिर क्यूँ नहीं आवाज उठाते,
अच्छी सरकार को वो बनाते,
दिलाई आजादी जब गांधी ने,
तो क्यूँ नि आवाज उठानी है,
कहना है मेरा उन लोगो से,
जो डरते है आवाज उठाने से ।।
हर मानव की आवाज में,
होता वो अधिकार है,
जिस तरह अन्ना हजारे ने,
हिला दी पूरी सरकार है,
अकेले ने ही चल कर,
सच्चाई का उजागर किया ,
लोगो ने जब ये देखा,
तो साथ उस आवाज का दिया,
सोचा न था कभी,
ये पल भी आयेगा,
थे जब सभी साथ,
और सरकार के खिलाफ,
था न कोई रास्ता,
सरकार के भी पास,
सुन्नी पड़ी सरकार को भी,
आम आदमी की वो आवाज,
झुकना पड़ा सरकार को भी,
अब तो खुद के ही खिलाफ,
होना चाहिए वो दम,
हर मानव की आवाज में,
चलना चाहिए अकेले ही,
उसे इस संसार में,
कहना है मेरा उन लोगो से,
जो डरते है आवाज उठाने से ।।
Written by:-
Renu Singh.



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