बेटी की सहेली होती है माँ
अच्छे से उसको समझती है माँ
न जाने क्यूँ ये रीत बनी
माँ को छोडनी पड़ गई बेटी अपनी,
मुझे भी प्यार चाहिये
माँ का वो लाड़ चाहिये
मैं भी चाहती हूँ बात करू
माँ से सबकी शिकायत करू
क्यूँ वो मेरे साथ नहीं
सर पर उसका हाथ नहीं,
मुझे भी प्यार चाहिये
माँ का वो लाड़ चाहिये
बिन माँ तेरे हूँ मैं अकेले
बात ये सबसे कहती नहीं
आँखों में आसु आते है जब
सबके सामने रोती मैं नहीं ,
मुझे भी प्यार चाहिये
माँ का वो लाड़ चाहिये
था बचपन जो बीत गया
तेरी यादों में जी लिया
रोती जब भी थी तेरे लिए
पापा ने खिलोनों से मना लिया
अब मेरी वो घडी है
दिल की बात जो कहनी है
नहीं रुकते आंसु मुझ पर
याद जब तेरी आती है ,
मुझे भी प्यार चाहिये
माँ का वो लाड़ चाहिये
महसूस होती है कमी आपकी
बेरंग लगती है दुनिया सारी
कहने को तो सब है मेरे पास
मुझे चाहिये बस, एक तेरा ही साथ,
मुझे भी प्यार चाहिये
माँ का वो लाड़ चाहिये
माँ तुमसे करनी है बातें बहुत
आजाओ एक बार तो अब
जान तो लो बेटी का दर्द
मिल तो लो एक बार ही अब ,
सर पर प्यार से हाथ फिराओ
खाने में मनपसंद खिलाओ
गोद में सर रखवा के
दर्द को मेरे सुनते जाओ,
मुझे भी प्यार चाहिये
माँ का वो लाड़ चाहिये
आँखे तरस रही है मेरी
देखने को एक तेरी छवि
में भी अब चाहती हूँ माँ
गले लगना, एक बार ही सही
जब भी कोई कहता माँ
उस पल मैं थम जाती हूँ माँ
दिल मेरा भी चाहता है
एक बार ही सही, कहने को माँ
मुझे भी प्यार चाहिये
माँ का वो लाड़ चाहिये !!
taareef karne ke liye shabd nahi hain.....out of this world...
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