हूँ मैं जिददी, कहते हैं सभी,
पापा भी कहते हैं, यही ।।
नहीं, शिकायत मुझे दुनिया से,
हैं, शिकायत तो वस् पापा से,
क्यों दिया बचपन से इतना प्यार,
कहने से पहले पूरी की हर बात ,
हूँ मैं जिददी कहते है सभी ,
पापा भी कहते हैं यही ।।
जब भी गलती मैं करती ,
डांट भईया को पड़ती,
गलती जब मैं करती हूँ,
तो, क्यों नहीं, डांट मुझको पड़ती,
अच्छे से जानती हूँ मैं,
की पापा की रानी हूँ मैं,
हूँ मैं जिददी कहते है सभी,
पापा भी कहते है यही ।।
अगर पापा ने डाँटा मुझको,
तो नाराज हो जाती हूँ मैं,
कमरे में अकेले बेठ कर,
सोचने लग जाती हूँ मैं ,
फिर थोड़ी ही देर में,
वापस मान जाती हूँ मैं,
हूँ मैं जिददी कहते है सभी,
पापा भी कहते है यही ।।
जब भी बंटी ने माँगा कुछ
तो पापा ने कहा ," अभी नहीं" ,
तो क्यों , पापा ने कहा, "अभी "
बेटी हूँ पापा की,
क्या इतना भी समझती नहीं,
कहते हो जिददी,
पर मानते हो बात सभी ,
जब मैंने माँगा ,गाड़ी ,मोबाइल ,लेप्पी,
क्यों हाँ, करके पापा ने मुझे कर दिया हैप्पी,
हूँ मैं जिददी कहते हैं सभी,
पापा भी कहते हैं यही ।।
Written by:-
Renu Singh.

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